Love Shayari in Hindi for Boyfriend,Romantic Shayari ...

भुला देंगे हम अपना गम सारा!
मिला दे रब जो हमको तुमसे दोबारा।

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 मेरा कत्ल करने की उसकी साजीश तो देखो
करीब से गुज़री तो चेहरे से पर्दा हटा लिया

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 आ जाओ लहराती इठलाती हुई,
तुम इन हवाओं की तरह!
मौसम ये बहुत बेदर्द है,
तुझे मेरे दिल से पुकारा है!!

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 अक्सर ठहर कर देखता हूँ
अपने पैरों के निशान को,
वो भी अधूरे लगते हैं…
तेरे साथ के बिना।

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  अभी कमसिन हैं जिदें भी हैं निराली उनकी,
इसपे मचले हैं हम कि दर्द-ए-जिगर देखेंगे।



 तेरी आँखों में जब से मैंने
अपना अक्स देखा है,
मेरे चेहरे को कोई आइना
अच्छा नहीं लगता।

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 रह न पाओगे भुला कर देख लो,
यकीं न आये तो आजमा कर देख लो,
हर जगह महसूस होगी मेरी कमी,
अपनी महफ़िल को कितना भी सजा कर देख लो।

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 तेरे रोज के वादों पे मर जायेंगे हम,
यूँ ही गुजरी तो गुजर जायेंगे हम।

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 तू तब तक रूला सकती है हमें,
जब तक हम दिल मे बसाये हैं तुझे.
ज़िस्म से मेरे तड़पता दिल कोई तो खींच लो​,
मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब ​ये यकीन ​है।

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 ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की,
मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था
तो मोहब्बत कैसे ना होती।

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 बिजलियाँ टूट पड़ी... जब वो मुकाबिल से उठा,
मिल के पलटी थीं निगाहें कि धुआँ दिल से उठा।

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 दुनिया बहुत मतलबी है,
साथ कोई क्यों देगा,
मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता,
तो बिना गम के प्यार कौन देगा।

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 मेरी तकमील में शामिल है तेरा हिसा भी ,
में अगर तुझ से ना मिलता तो अधूर ही रहता !

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 हाल यह है के तेरी याद में गम हूँ !
सब को मेरी और मझे को तेरी पड़ी रहती है !

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 ताज़ी है अब भी उस मुलाकात की खुशबू
जज़्बात में डूबे हुवे लम्हात की खुशबू
जिस हाथ कों पल भर के लिए थाम लिया था
मुद्दत से है हाथ में उसी हाथ की खुशबू

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 हम ने ही सिखाया था उने बाते करना !
आज हमारे लिए ही वक्त नही है !!

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 कुर्बान हो जाऊं उस सख्स
के हाथों की लकीरों पर
जिसने तुझे माँगा भी नहीं
और तुझे अपना बना लिया ......!

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 उसकी आंखे इतनी गहरी थी की ,
तैरना तो आता था मगर
डूब जाना अच्छा लगा .

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 उनकी दुनिया में हम जैसे हजारो हैं !
हम ही पागल है जो उसे पाकर मगरूर हो गए !!

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 वो पत्थर कहाँ मिलेंगे दोस्तों
जिसे लोग दिल पर रख कर
एक दूसरे को भूल जाते हैं।

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 जो कभी मेरी उदासी की वजह पूछा करता था
अब उसको मेरे रोने से भी फर्क नहीं पढ़ता।

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 दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते!
गम के आंसू न बहाते तो और क्या करते!
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ!
हम खुद को न जलाते तो और क्या करते!

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 कभी न कभी वो मेरे बारे में सोंचेगी ज़रूर..
के हासिल होने की उम्मीद भी नही थी,
फिर भी वफ़ा करता था !!

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 छोङो ना यार,
क्या रखा है सुनने और सुनाने मेँ,
किसी ने कसर नहीँ छोङी दिल दुखाने मेँ..

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 अजीब कशमकश है जान किसे दें।
वो भी आ बैठे और मौत भी।

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 इतनी सी बात थी जो समन्दर को खल गई...
का़ग़ज़ की नाव कैसे भँवर से निकल गई......

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 उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर तो ना उठाओ,
जिसे हो शक़ वो मुझसे निभाकर देखे...

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 अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे
याद करते हो तो अब मत करना,
क्योंकि मैं तन्हा जरूर हूँ ...
मगर फ़िज़ूल बिलकुल नहीं...

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 किसी के दिल में क्या छुपा है
ये बस खुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनकाब होता
तो सोचो कितना फसाद होता..

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 तुझसे अच्छे तो जख्म हैं मेरे ।
उतनी ही तकलीफ देते हैं
जितनी बर्दाश्त कर सकूँ ।।

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 सुना है के तुम रातों को देर तक जागते हो
यादों के मारे हो या मोहब्बत में हारे हो...

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 रास्ते वही होंगे और नज़ारे वही होंगे,
पर हमसफ़र अब हम तुम्हारे नहीं होंगे।

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 रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई.

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 बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है.

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 तुझे चिठ्ठीयां नहीं करवटो की नकल भेजेंगे,
अब चादर के नीचे कार्बन लगाने लगे हैँ हम,
एक ख्वाहिश है मेरी, पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आकर लिपटे मुझसे, मेरी इजाजत के बगैर.

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 बेवफा तेरा मासुम चेहरा
भुल जाने के काबिल नही।
है मगर तु बहुत खुबसुरत
पर दिल लगाने के काबिल नही.

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 एक पुराना मोसम लोटा,,याद भरी पुरवायी भी,
ऐसा तो कम ही होता है,,वो भी हो तन्हाई भी

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 ख्वाब हमारे टूटे तो हालात कुछ ऐसी थी,
आँखे पल पल रोती थीं
किस्मत हँसती रहती थी

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 तेरे ना होने से बस इतनी सी कमी रहती है
मै लाख मुस्कुराउ आखो मे नमी सी रहती है.

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 उसने दरिया में डाल दी होगी
मेरी मोहब्बत भी.... एक नेकी थी

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 गुजारिश हमारी वह मान न सके,
मज़बूरी हमारी वह जान न सके,
कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे,
जीते जी जो हमें पहचान न सके.

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 कोई रास्ता नही दुआ के सिवा,
कोई सुनता नही खुदा के सिवा,
मैने भी ज़िंदगी को करीब से देखा है मेरे दोस्त,
मुस्किल मे कोई साथ नही देता आँसू के सिवा.

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 कोई छुपाता है, कोई बताता है,
कोई रुलाता है, तो कोई हंसाता है,
प्यार तो हर किसी को ही किसी न किसी से हो जाता है,
फर्क तो इतना है कि कोई अजमाता है और कोई निभाता है!

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 महकाने लाख बंद करे जमाने वाले
शहर में कम नहीं आखों से पिलाने वाले

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 तेरी औकात ही क्या है
रुह मे मेरे बसने की...!!!?
हम तो शायर है..
लोगों की नस_नस में बस जाते है...!!

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 कोशिश बहुत की राज़-ए-मुहब्बत बयाँ न हो,
मुमकिन कहाँ था की आग लगे और धुँआ न हो

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 खबर क्या थी होठों को सीना पड़ेगा
मोहब्बत छुपाकर भी जीना पड़ेगा
जिये तो मगर जिंदगानी पे रोये

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 मेरे हाथों में उनका हाथ आया तो
महसूस हुआ ज़िंदगी ही हाथ लग गई हो जैसे..

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 तुझे कोई और भी चाहे,
इस बात से दिल थोडा थोडा जलता है,
पर फखर है मुझे इस बात पे कि,
हर कोई मेरी पसंद पर मरता हैँ
 सवाल तेरे मेरे दर्मियान बाकी है
नही अभी तो नही खत्म ज़िन्दगी होगी
अभी तो मेरे कई इम्तिहान बाकी है !
सुबूत इसके सिवा दोस्ती का क्या दूँ मै
अभी तो चोट के गहरे निशान बाकी है !
जो एक आसमाँ टूट भी गया है तो क्या
अभी तो सर पे कई आसमान बाकी है!!!!

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 मुस्कुरा के गम भुलाना जिन्दगी है
मिलकर लोग खुश होते हैं तो क्या हुआ
बिना मिले दोस्ती निभाना भी जिन्दगी है

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 दस्तूर-ऐ-वफा हम इस तरहा निभाऐंगे
तुम रोज खफा होना हम रोज मनाऐंगे
तेरी दोस्ती का सिला हम इस तरहा चुकाऐंगे
शादी हो तेरी और दुल्हन हम ले जाऐंगे

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 क्यों इतना गमो से वास्ता रखने लगा हू
खुद से ही क्यों जुदा होने लगा हुँ।
उस अनजान कि खातिर जान पहचान वालो से
रकीबो सा रिश्ता रखने लगा हुँ।
इतना जिद्दी तो वो खुदा भी नहीं जिसने बनाया है
उसे क्यों उसके लिए खुदा से रूठ रहा हुँ।
बहुत दूर है वो समझता है दिल मेरा

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 वफा के वादे वो सारे भूला गया चुप-चाप
वो मेरे दिल की दिवारें हिला गया चुप-चाप
ना जाने कौन सा वो बद-नसीब लम्हा था
जो गम की आग में मुझ को जला गया चुप-चाप
गम-ऐ-हयात के तपते हुए बया-बांन में
हमें वो छोड के चला गया चुप-चाप
मैं जिसको छुता हुँ वो जख्म देता

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 एक मुलाक़ात करो हमसे इनायत समझकर
हर चीज़ का हिसाब देंगे क़यामत समझकर
मेरी दोस्ती पे कभी शक ना करना
हम दोस्ती भी करते है इबादत समझकर.

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 नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना
अगर काम पड़े तो याद करना
मुझे तो आदत है आपको याद करने की
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना

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 वो मुझे चाहे मिल ही जाऐ जरूरी तो नहीं
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसो में
वो सामने हो मेरी आँखो के जरूरी तो नहीं

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 दोस्त जो है साथ फिर डर किस बात का है
भला कभी कभी बस आप जुदा हो जाते हैं
हमारे दिल में बस दर्द इस बात का हैं

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 हर इल्जाम का हकदार वो हमे बना जाते है,
हर खता कि सजा वो हमे सुना जाते है,
हम हरबार खामोश रह जाते है,
क्योकी वो अपना होने का हक जता जाते है.


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