love sms for wife to my girlfriend love-sms.Net



अधूरी है हर आयत मेरी तेरे ज़िक्र के बिना......
मेरे हर लफ़्ज़ मेरी हर दुआ की जैसे रूह तुम हो....
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"ना इश्क चाहते हैं
ना अश्क चाहते हैं
हम तो बस तुम्हारे लिए
खुशियों वाला वो शख्स चाहते हैं "
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दो आईने को देखकर देखा किया तुझे
तेरी आंखों में डूबकर देखा किया तुझे
सुन ले जरा क्या कह रही तुमसे मेरी निगाह
खामोशियों से बोलकर देखा किया तुझे
लहरें तो आके रूक गईं साहिल को चूमकर
आंसू पलक में रोककर देखा किया तुझे
तेरी उदासियों में तस्वीर है मेरी
ये सोचके बस एकटक देखा किया तुझे
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ऐ ज़िँदगी, अब तू ही रुठ जा मुझसे..
ये रुठे हुए लोग, मुझसे मनाए नहीँ जाते…
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एक सुकून की तलाश मे जाने
कितनी बेचैनियां पाल ली,
और लोग कहते है हम बडे हो
गए हमने जिंदगी संभाल ली.
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मेरी आवारगी में कुछ दखल तुम्हारा भी है
क्यों की जब तेरी याद आती है
तो घर अच्छा नही लगता
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चल अब मेरी साँस की
जमानत रखा ले तू
शायद इस तहर में बन
जाऊ तेरे एतबार के काबिल
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सच कहू तो में आज भी इस सोच में गुम हू !!!!
में तुम्हे जीत तो सकता था जाने हरा क्यों ? 
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लफज़ , अल्फाहाज , कागज़ ,
किताब कहाँ कहाँ रखे
हम तुम्हारी यादों का हिसाब
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दबे होंठों को बनाया है सहारा अपना,
सुना है कम बोलने से
बहुत कुछ सुलझ जाता है.!!
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मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर..
मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर
सांस तुम्हें याद करते करते..!!
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मोहब्बत की आजमाइश दे दे
कर थक गया हूँ ऐ खुदा..
किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे,
जो मौत तक वफा करे।
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तेरी यादों ने मुझे क्या खूब
मशरूफ किया है ऐ सनम..
द से मुलाकात के लिए भी
वक़्त मुकर्रर करना पड़ता है।
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ना प्यार कम हुआ है
ना ही प्यार का अहेसास,
बस उसके बिना जिन्दगी
काटने की आदत हो गई है !!
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कौन चाहता है खुद को बदलना,
किसी को प्यार तो किसी
को नफरत बदल देती है।
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इस नाज़ुक दिल में किसी के लिए
इतनी मोहबत आज भी है यारो.
की हर रात जब तक आँखे ना
भीग जाये नीद नही आती
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कुछ खास नही बस इतनी सी है
मोहब्बत मेरी .. .!!
हर रात का आखरी खयाल और
हर सुबह की पहली सोच हो तुम.
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इतनी ठोकरे देने के
लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी
चलने का न सही,
सम्भलने का हुनर तो आ गया
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वक़्त मिला उसे तो हमें
भी याद कर ही लेगा वो,
फ़ुरसत के लम्हों में हम
भी बड़े ख़ास हैं उसके लिए.
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मेरी तन्हाई पुछती हे मुझसे,
बता आज कौन बिछड गया तुझसे,
क्या बताऊँ की मेरा कोई साथी ही नही,
शायद आज जुदा हो गया हुँ खुद से.!
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बस कर........
अब और इम्तिहान मत ले
मेरे सब्र का ऐ ज़िन्दगी...
वर्ना मुझे बस कुछ ही वक़्त
लगेगा तेरा ये खेल ख़त्म करने में...
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इश्क करते है तुमसे
इसलिए खामोश है अबतक,,,
खुदा न करे मेरे लब
खुले और तुम बर्बाद हो जाओ.....
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हमको खबर भी होने नही दी
किस मोड़ पर लाकर दिल तुने तोड़ा
अपना बनाना रहा दूर तुने
औरो के हो जाए ,ऐसा ना छोड़ा
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कुछ बातों के मतलब हैं
और कुछ मतलब की बातें, . . .
जब से फर्क समझा,
जिंदगी आसान हो गई!!
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दुरिया खलती है मुझे....
इतने करीब रिश्तों में...!!
कि आ भी जाओ मेरे पास. ..
यु ना मोहब्बत दो मुझे किश्तो मे..!!
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इतना भी गुमान न कर
आपनी जीत पर ऐ बेखबर,
शहर में तेरे जीत से ज्यादा
चर्चे तो मेरी हार के हैं..!!
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तुम खुश-किश्मत हो जो
हम तुमको चाहते है वरना,
हम तो वो है जिनके ख्वाबों मे
भी लोग इजाजत लेकर आते है..!!
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वो खुद पर गरूर करते है,
तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते है,
वो आम हो ही नहीं सकते !!
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तुम जिन्दगी में आ तो
गये हो मगर ख्याल रखना,
हम जान दे देते हैं
मगर जाने नहीं देते !! 
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जा माफ़ किया जी ले
अपनी मर्ज़ी की ज़िन्दगी ,
हम मोहब्बत के बादशाह है
बेवफाओं को मुँह नहीं लगाते।

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मुद्दत बाद जब उसने मेरी
खामोश आँखें देखी तो ये
कहकर फिर रुला गया कि
लगता है अब सम्भल गए हो
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मुझ को अब तुझ से भी मोहब्बत नहीं रही,
ऐ ज़िंदगी तेरी भी मुझे ज़रूरत नहीं रही,
बुझ गये अब उस के इंतेज़ार के वो जलते दिए,
कहीं भी आस-पास उस की आहट नहीं रही|

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अरे कितना झुठ बोलते हो तुम..
खुश हो और कह रहे
हो मोहब्बत भी की है
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जिस्म‬ पर ‪‎जो निशान‬ हैं ना ‪‎जनाब‬,
वो ‪बचपन के‬ हैं बाद के‬
तो ‪सारे दिल‬ ‪‎पर है‬ ।।
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हम‬ भी ‪‎किसी‬ की ‪दिल‬
की ‪हवालात‬ में ‪‎कैद‬ थे..!!
फिर‬ उसने ‪‎गैरों‬ के ‪‎जमानत‬
पर हमें ‪ रिहा‬ कर दिया..!!

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वो गुस्से में तेरा लब से
मेरे सिगरेट हटा देना उसी
दिलकश अदा की याद
में अब कश लगाते हैं !!

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अफ़सोस होता है उस पल जब
अपनी पसंद कोई ओर चुरा लेता है..
ख्वाब हम देखते है..
और हक़ीक़त कोई और बना लेता है.

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ना जाने क्या कमी है मुझमें,
ना जाने क्या खूबी है उसमें,
वो मुझे याद नहीं करती,
मैं उसको भूल नहीं पाता  

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कोई मिला नहीं तुम
जैसा आज तक,
पर ये सितम अलग है
की मिले तुम भी नही

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बड़ी अजीब सी मोहब्बत थी तुम्हारी……
पहले पागल किया..फिर पागल कहा..
फिर पागल समझ कर छोड़ दिया..

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याद है मुझे मेरी हर एक गलती,
एक तो मोहब्बत कर ली,
दुसरी तुमसे कर ली,
तिसरी बेपनाह कर ली

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हर बार सम्हाल लूँगा गिरो
तुम चाहो जितनी बार,
बस इल्तजा एक ही है कि
मेरी नज़रों से ना गिरना...!!

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वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही,
इश्क़ में प्रेमी कभी झुकता नही,
खामोश हैं हम किसी के खुशी के लिए,
ना सोचो के हमारा दिल दुःखता नहीं!

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गुलाम बनकर जिओगे तो.
कुत्ता समजकर लात मारेगी तुम्हे ये दुनिया
नवाब बनकर जिओगे तो,
सलाम ठोकेगी ये दुनिया….
दम कपड़ो में नहीं,
जिगर में रखो….
बात अगर कपड़ो में होती तो,
सफ़ेद कफ़न में,
लिपटा हुआ मुर्दा भी सुल्तान मिर्ज़ा होता

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भुला देंगे तुमको ज़रा सब्र तो कीजिये ,
आपकी तरह मतलबी बनने
में थोड़ा वक़्त तो लगेगा हमें।
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मोहब्बत भी हाथों में लगी
मेहँदी की तरह होती है
कितनी भी गहरी क्यों ना
हो फीकी पड़ ही जाती है।

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इरादा कतल का था तो
मेरा सिर कलम कर देते ,
क्यों इश्क़ में डाल कर तूने
मेरी हर साँस पर मौत लिखदी
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 हमें तो प्यार के दो
लफ़्हज़ भी ना नसीब हुए..
और बदनाम ऐसे हुए जैसे
इश्क़ के बादशाह थे हम
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अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे
याद करते हो तो अब मत करना,
क्योंकि मैं तन्हा जरूर हूँ ...
मगर फ़िज़ूल बिलकुल नहीं...

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किसी के दिल में क्या छुपा है
ये बस खुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनकाब होता तो
सोचो कितना फसाद होता.
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चाहत देस से आनेवाले ये
तो बता के सनम कैसे हैं ..?
दिलवालों की क्या हालत हैं,
यार के मौसम कैसे हैं ...


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न समझ मैं भूल गया हूँ तुझे,
तेरी खुशबू मेरे सांसो में आज भी हैं ।
मजबूरियों ने निभाने न दी मोहब्बत,
सच्चाई मेरी वफाओ में आज भी हैं ।

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परछाई आपकी हमारे दिल में है,
यादे आपकी हमारी आँखों में है,
कैसे भुलाये हम आपको,
प्यार आपका हमारी साँसों में है.
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आ जाओ लहराती इठलाती हुई,
तुम इन हवाओं की तरह!
मौसम ये बहुत बेदर्द है,
तुझे मेरे दिल से पुकारा है!!

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अक्सर ठहर कर देखता हूँ
अपने पैरों के निशान को,
वो भी अधूरे लगते हैं…
तेरे साथ के बिना।


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तेरी आँखों में जब से मैंने
अपना अक्स देखा है,
मेरे चेहरे को कोई आइना
अच्छा नहीं लगता।

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रह न पाओगे भुला कर देख लो,
यकीं न आये तो आजमा कर देख लो,
हर जगह महसूस होगी मेरी कमी,
अपनी महफ़िल को कितना भी सजा कर देख लो।

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दुनिया बहुत मतलबी है,
साथ कोई क्यों देगा,
मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता,
तो बिना गम के प्यार कौन देगा।


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ताज़ी है अब भी उस मुलाकात की खुशबू
जज़्बात में डूबे हुवे लम्हात की खुशबू
जिस हाथ कों पल भर के लिए थाम लिया था
मुद्दत से है हाथ में उसी हाथ की खुशबू

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कुर्बान हो जाऊं उस सख्स
के हाथों की लकीरों पर
जिसने तुझे माँगा भी नहीं
और तुझे अपना बना लिया ....

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दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते!
गम के आंसू न बहाते तो और क्या करते!
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ!
हम खुद को न जलाते तो और क्या करते!
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अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे
याद करते हो तो अब मत करना,
क्योंकि मैं तन्हा जरूर हूँ ...
मगर फ़िज़ूल बिलकुल नहीं...
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किसी के दिल में क्या छुपा है
ये बस खुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनकाब होता
तो सोचो कितना फसाद होता
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रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई.

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बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है.
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तुझे चिठ्ठीयां नहीं करवटो की नकल भेजेंगे,
अब चादर के नीचे कार्बन लगाने लगे हैँ हम,
एक ख्वाहिश है मेरी, पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आकर लिपटे मुझसे, मेरी इजाजत के बगैर.
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बेवफा तेरा मासुम चेहरा
भुल जाने के काबिल नही।
है मगर तु बहुत खुबसुरत
पर दिल लगाने के काबिल नही.
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गुजारिश हमारी वह मान न सके,
मज़बूरी हमारी वह जान न सके,
कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे,
जीते जी जो हमें पहचान न सके.
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कोई रास्ता नही दुआ के सिवा,
कोई सुनता नही खुदा के सिवा,
मैने भी ज़िंदगी को करीब से देखा है मेरे दोस्त,
मुस्किल मे कोई साथ नही देता आँसू के सिवा
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कोई छुपाता है, कोई बताता है,
कोई रुलाता है, तो कोई हंसाता है,
प्यार तो हर किसी को ही किसी न किसी से हो जाता है,
फर्क तो इतना है कि कोई अजमाता है और कोई निभाता है!

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तेरी औकात ही क्या है
रुह मे मेरे बसने की...!!!?
हम तो शायर है..
लोगों की नस_नस में बस जाते है...!!
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खबर क्या थी होठों को सीना पड़ेगा
मोहब्बत छुपाकर भी जीना पड़ेगा
जिये तो मगर जिंदगानी पे रोये
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तुझे कोई और भी चाहे,
इस बात से दिल थोडा थोडा जलता है,
पर फखर है मुझे इस बात पे कि,
हर कोई मेरी पसंद पर मरता हैँ

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सवाल तेरे मेरे दर्मियान बाकी है
नही अभी तो नही खत्म ज़िन्दगी होगी
अभी तो मेरे कई इम्तिहान बाकी है !
सुबूत इसके सिवा दोस्ती का क्या दूँ मै
अभी तो चोट के गहरे निशान बाकी है !
जो एक आसमाँ टूट भी गया है तो क्या
अभी तो सर पे कई आसमान बाकी है!!!!

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दस्तूर-ऐ-वफा हम इस तरहा निभाऐंगे
तुम रोज खफा होना हम रोज मनाऐंगे
तेरी दोस्ती का सिला हम इस तरहा चुकाऐंगे
शादी हो तेरी और दुल्हन हम ले जाऐंगे

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क्यों इतना गमो से वास्ता रखने लगा हू
खुद से ही क्यों जुदा होने लगा हुँ।
उस अनजान कि खातिर जान पहचान वालो से
रकीबो सा रिश्ता रखने लगा हुँ।
इतना जिद्दी तो वो खुदा भी नहीं जिसने बनाया है
उसे क्यों उसके लिए खुदा से रूठ रहा हुँ।
बहुत दूर है वो समझता है दिल मेरा


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वफा के वादे वो सारे भूला गया चुप-चाप
वो मेरे दिल की दिवारें हिला गया चुप-चाप
ना जाने कौन सा वो बद-नसीब लम्हा था
जो गम की आग में मुझ को जला गया चुप-चाप
गम-ऐ-हयात के तपते हुए बया-बांन में
हमें वो छोड के चला गया चुप-चाप
मैं जिसको छुता हुँ वो जख्म देता

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एक मुलाक़ात करो हमसे इनायत समझकर
हर चीज़ का हिसाब देंगे क़यामत समझकर
मेरी दोस्ती पे कभी शक ना करना
हम दोस्ती भी करते है इबादत समझकर.

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नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना
अगर काम पड़े तो याद करना
मुझे तो आदत है आपको याद करने की
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना

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हर इल्जाम का हकदार वो हमे बना जाते है,
हर खता कि सजा वो हमे सुना जाते है,
हम हरबार खामोश रह जाते है,
क्योकी वो अपना होने का हक जता जाते है.

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साथ में गुजारी हर वो, शाम भूल गए,
मोहब्बत वाली बातें, तमाम भूल गए,
कायनात में कायम,बहुत
कम ही रहते हैं अपने वादे पे,
फिर भी, गिला यही है
कि तुम मेरा, नाम भूल गए.

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 आज उन्हे फुर्सत नही हमसे बात करने की,
ये जिन्दगी गुजर गई उनकी फरियाद करके,
वो आए हमारी मौत पे,
तो कह देना अभी सोया है आपको याद करके.

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लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।  

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दिल से खेलना हमे आता नहीं,
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए,
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें,
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए.

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रास्ता ऐसा भी दुशवार न था,
बस उसको हमारी चाहत पे ऐतबार न था,
वो चल न सकी हमारे साथ वरना,
हमे तो जान देने से भी इनकार न था.
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हम भूल जाये ऐसी दिल की हसरत कहाँ,
वो याद करे हमे इतनी उसे फुर्सत कहाँ,
जिनके चारो तरफ हो अपनों का साथ,
उन्हें हमारी जरुरत कहाँ.
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जिसने भी की मुहब्बत, रोया जरूर होगा।
वो याद में किसी के खोया जरूर होगा।
दिवार के सहारे, घुटनों में सिर छिपाकर ,
वो ख्याल में किसी के खोया जरुर होगा।
आँखों में आंसुओ के, आने के बाद उसने,
धीरे से उसको उसने, पोंछा जरुर होगा।
जिसने भी की मुहब्बत, रोया जरूर होगा।  
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पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में,
नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आँसू पूरी किताब है!!
सो जा ऐ दिल कि अब धुन्ध बहुत है तेरे शहर में,
अपने दिखते नहीं और जो दिखते है वो अपने नहीं…।

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हम तो इन्तेजार करते करते
अब मर जायेंगे...
कोइ तो आये एेसा जिन्दगी में
जो बेवफा ना हो

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दिल की उम्मीदों का हौसला तो देखो...
इन्तजार उसका..
जिसको एहसास तक नहीं

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कुछ बातों के मतलब हैं
और कुछ मतलब की बातें, . . .
जब से फर्क समझा,
जिंदगी आसान हो गई!!
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दुरिया खलती है मुझे....
इतने करीब रिश्तों में...!!
कि आ भी जाओ मेरे पास. ..
यु ना मोहब्बत दो मुझे किश्तो मे..!!
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इतनी हिम्मत तो नहीं किसी
को हाल –ये –दिल सुना सके ,
बस जिसके लिये उदास है
बो महसूस करे तो काफी है  

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कहीं तुम भी न बन जाना
किरदार किसी किताब का
लोग बड़े शौक से पड़ते है
कहानिया बेवफाओं की

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तुझे क्या देखा, खुद को ही
भूल गए हम इस क़दर
कि अपने ही घर जो आये
तो औरों से पता पूछ पूछकर

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इतना आसान नहीं है जीवन
का हर किरदार निभा पाना,
इंसान को बिखरना पड़ता है
रिश्तों को समेटने के लिए...

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अजब सी खामोशी हैं मेरे
अंदर तेरे जाने के बाद....
मै चीखती हु, चिल्लाती हु
मगर शोर नहीं होता!!


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मैं जहर तो पी लु शौक से तेरी खातिर..
पर शर्त ये है कि तुम सामने
बैठ कर सासो को टूटता देखो

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चाहत देस से आनेवाले ये
तो बता के सनम कैसे हैं ..?
दिलवालों की क्या हालत हैं,
यार के मौसम कैसे हैं ...

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टूट कर बिखर जाते है वो
लोग मिट्टी की दीवारो कि तरह,
जो खुद से भी ज्यादा किसी और
से मुहब्बत किया करते है...

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ना जाने क्या कहा था
डूबने वाले ने समंदर से,
कि लहरें आज तक साहिल
पे अपना सर पटकती हैं।

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कभी कोई अपना अनजान हो जाता है,
कभी अनजान से प्यार हो जाता है,
ये जरुरी नही कि जो ख़ुशी दे उसी से प्यार हो,
दिल तोड़ने वालो से भी प्यार हो जाता है।

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आज अचानक तेरी याद ने मुझे रुला दिया,
क्या करूँ तुमने जो मुझे भुला दिया,
न करती वफ़ा न मिलती ये सज़ा,
शायद मेरी वफ़ा ने ही तुझे बेवफा बना दिया।

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हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले,
न थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले,
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें,
तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले।

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सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली;
एक तुझको भूल जाने की मोहलत न मिली;
करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर;
हमको तेरे ख्याल से कभी फुर्सत न मिली।

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किसी ने यूँ ही पुछ लिया हमसे
कि दर्द की कीमत क्या है;
हमने हँसते हुए कहा, पता नहीं
कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।

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रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी;
कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी;
ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी;
बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।


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वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं;
कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं;
दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद;
वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।


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साँस थम जाती है पर जान नहीं जाती;
दर्द होता है पर आवाज़ नहीं आती;
अजीब लोग हैं इस ज़माने में ऐ दोस्त;
कोई भूल नहीं पाता और किसी को याद नहीं आती।
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इतनी बेचैनी से तुमको किसकी तलाश है,
वो कौन है जो तेरी आंखों की प्यास है,
जबसे मिला हूं तुमसे यही सोचता हूं मैं,
क्यों मेरे दिल को हो रहा तेरा एहसास है,
जिंदगी के इस मोड़ पे तुम आके यूं मिले,
जैसे कि कोई मंजिल मेरे इतने पास है,
एक नजर की आस में तकता हूं मैं तुझे,
अब देख तेरे खातिर एक आशिक उदास है|
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उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह,
तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ,
देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा,
ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ.
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प्यार करो तो हमेशा मुस्कुरा के,
किसी को धोखा ना दो अपना बना के,
कर लो याद जब तक हम ज़िंदा है,
फिर ना कहना की चले गये दिल मे यादें बसा के...
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जहां भी देखा गम का साया,
तू ही तू मुझको याद आया,
ख्वाबों की कलियां जब टूटी,
ये गुलशन लगने लगा पराया,
दरिया जब-जब दिल से निकला,
एक समंदर आंखों में समाया,
मेरे दामन में कुछ तो देते,
यूं तो कुछ नहीं मांगा खुदाया|
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खून से जब जला दिया एक दिया बुझा हुआ;
फिर मुझे दे दिया गया एक दिया बुझा हुआ;
महफ़िल-ए-रंग-ओ-नूर की फिर मुझे याद आ गयी;
फिर मुझे याद आ गया एक दिया बुझा हुआ।
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हुआ जब इश्क़ का एहसास उन्हें;
आकर वो पास हमारे सारा दिन रोते रहे;
हम भी निकले खुदगर्ज़ इतने यारो कि;
ओढ़ कर कफ़न, आँखें बंद करके सोते रहे।
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दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे
सदियों तलक जमीं पे तेरी कयामत रहे
और भी दुनिया में आएंगे आशिक कितने
उनकी आंखों में तुमको देखने की चाहत रहे
इश्क के तमाशे में हमेशा तेरे किरदार से
दर्द और खामोशी के अश्कों की शिकायत रहे
खुमारियों के चंद लम्हों का है तेरा सुरूर
उसमें डूबकर मरने से दिल को राहत रहे

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क़दर करलो उनकी जो तुमसे
बिना मतलब की चाहत करते हैं..
दुनिया में ख्याल रखने वाले कम
और तकलीफ देने वाले ज़्यादा होते है..!
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लोग कहते हैं किसी एक के चले
जाने से जिन्दगी अधूरी नहीं होती,
लेकिन लाखों के मिल जाने से
उस एक की कमी पूरी नहीं होती है…


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ना हीरों की तमन्ना है
और ना परियों पे मरता हूँ..
वो एक “भोली” सी लडकी हे
जिसे मैं मोहब्बत करता हूँ !!

















 

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