Diwali Hindi heart touching Poetry (Poem) Ek gareeb bacche ki kahani



” Ek gareeb bacche ki kahani ” – Hindi Poetry

पटाखों कि दुकान से दूर हाथों में…,
…कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा…!!
.
…एक गरीब बच्चे की आंखो में…,
…मैने दिवाली को मरते देखा…!!
.
…थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की…
…पर उन्ही पुराने कपडों को मैने उसे साफ करते देखा…!!
.
…हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश…,
…उसे चुपचाप ग़मो को पीते देखा…!!
.
…जब मैने कहा, “बच्चे, क्या चहिये तुम्हे”?
…तो उसे चुपचाप मुस्कुरा कर…,
…”ना” मे सिर हिलाते देखा…!!
.
…थी वह उम्र बहुत छोटी अभी…,
…पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देख…!!
.
…रात को सारे शहर के दीपों की लौ में…,
…मैने उसके हसते, मगर बेबस चेहरे को देखा…!!
.
…हम तो ज़िन्दा हैं अभी शान से यहाँ…,
…पर उसे जीते जी शान से मरते देखा…!!
.
…लोग कहते है…,
…त्यौहार होते हैं ज़िन्दगी में खुशियों के लिए…,
…तो क्यों मैने उसे मन ही मन में घुटते और तरसते देखा…???

.
है कोई जवाब दुनिया वालो…????

Post a comment

0 Comments