Best Heart Touching Romantic Love Shayari Sms in Hindi ...

पिंजरे में बुलबुल की जिंदगानी भी देखी
कांटों में एक गुल की जवानी भी देखी
हर पल दर्द का एक नया मोड़ लेती
मुहब्बत की कमसिन कहानी भी देखी
सौतन की दुश्मनी को भी मात देती
दुनिया की बेरहम कारस्तानी भी देखी
मेरे इश्क को ठुकराने से ठीक पहले
तेरे लब की दिलकश परेशानी भी देखी
कितनी चोटें तूने छोड़ी मेरे दिल पे
तेरे जख्मों की हर एक निशानी भी देखी

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  हम हैं कहीं दूर बैठे तेरी याद में तन्हा
मगर दर्द के सिवा मेरे दिल को क्या हासिल
कितनी बार गुजर गई तुम मेरे करीब से
तेरी परछाई के सिवा आईने को क्या हासिल
ये दिल इतना बेबस है, कुछ कह नहीं सकता
आलमे-खामोशी में आंसुओं को क्या हासिल
दूर हो इतनी फिर भी तेरे आने का शुक्रिया
याद बनके सही, मुझे इतना तो है हासिल

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  कोशिश कर, हल निकलेगा
आज नही तो, कल निकलेगा।
अर्जुन के तीर सा निशाना साध,
जमीन से भी जल निकलेगा ।
मेहनत कर, पौधो को पानी दे,
बंजर जमीन से भी फल निकलेगा ।
ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे,
फौलाद का भी बल निकलेगा ।.
जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को,
समन्दर से भी गंगाजल निकलेगा ।
कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की,
जो है आज थमा-थमा सा, वो चल निकलेगा.
कोशिश कर, हल निकलेगा
आज नही तो, कल निकलेगा।

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 कल भी सोचा था तेरे बारे में
आज भी खोया तेरे खयालों में
वो उदासी भरा तेरा चेहरा
कितने आंसू थे उन निगाहों में
बेजुबां इश्क का निशां न मिटा
दर्द बनकर है तू मेरी आहों में
तुम मेरे दिल में उतर आई हो
रात कटती है गजल की बाहों में



 दोनों चिरागों में दो समंदर
देखा है उनकी आंखों के अंदर
अपने खयालों में देखा जिनको
आज नजर में आए वो दिलबर
जुल्फें या आंखें, चेहरा या चितवन
हरसूं हैं उनमें जलवों के खंजर
नाजुक बदन जब निकले फिजा में
खुशबू से भर जाए सारा मंजर

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 हाले दिल वो प्यार से पूछने आए
मेरी कमजोरी को वो परखने आए
कौन क्या है कहना मुश्किल है
लोग ऐसे-ऐसे मेरे सामने आए
दगा देकर भी हंसते रहते हैं
ऐसे चेहरों के अब तो मौसम आए
आजकल प्यार सरेआम बरसता है
हमारे पास धोखे खाकर कितने आए

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 चाँद बदन को चूम रहा है, दरिया गुमसुम लेटी है
पंखा झलती है हवाएँ, हलचल थोड़ी होती है
बादलों की छत से सितारे, देख रहे हैं आँखे फाड़े
बैठ गगन भी सोच रहा है, धरती सुंदर लगती है
आज भी परदेश गया है, सूरज शाम की गाड़ी से
दिन के रथ पे बैठके फिर से रात की रानी आई है
वक़्त का पहरा हुआ ढीला,उसने पी ली इश्क की बोतल
मौसम भी आजाद हुआ है, मिलन की खुशबू उड़ती है

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 मेरे हंसने से तड़पता ये जमाना होगा
तेरा गम देख के रोता ये जमाना होगा
इस मुहब्बत में मंजिल जो पा न सके
उनका दुनिया में फिर कैसे ठिकाना होगा
ऐ बहारों मुझे तू फूल अभी मत देना
इतना तन्हा हूं कि कांटों से निभाना होगा
मेरे अपने आज घर पे आने वाले हैं
खुशी बिखरी है यहां, उनको दिखाना होगा

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 जान देने के सिवा एक और चारा है
इस जुदाई में लिखना भी एक सहारा है
शाम कट जाती है दरिया पे बैठे-बैठे
रात संग चाँद-सितारों का उजाला है
चंद रिश्तों को हम आज भी निभाते हैं
उनसे मिलना भी मेरे दिल को गँवारा है
भले दुनिया नहीं देखेंगे इन आँखों से
मौत की राह देखना भी एक नजारा है

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  मुझे देखकर मुँह फेर लो, ऐसी भी क्या तेरी बेरूखी
महफिल में दूर-दूर हो, ऐसी भी क्या तेरी बेबसी
मुड़के जो देखती हो तुम, मजबूर हो क्यूँ दिल से तुम
मुझे इस तरह न तलाश कर कि बदनाम हो दीवानगी
जब-जब सितम तूने किया, हम सह गए दिल खोल कर
जालिम है तेरी हर अदा, कातिल है तेरी आशिकी
खत की तरह खामोश तुम, तेरा हुस्न ही मजमून है
तेरे नैनों पे गजल लिखी, तेरे नक्श में है शायरी

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  अगर जो दिल की सुनो तो हार जाओगे..
हम जैसा प्यार फिर कहाँ से पाओगे..
जान देने की बात को हर कोई करता है..
जिन्दगी बनाने वाला कहाँ से लाओगे..
जो इक नज़र देखोगे हमें..
हर तरफ हमको ही पाओगे..
यकीं अपनी चाहत का इतना है मुझे..
मेरी आँखो में झाँकोगे और लौट आओगे..
मेरी यादों के समंदर में जो डूब गऐ तुम..
कहीं जाना भी चाहोगे तो जा नहीं पाओगे..

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 उम्रभर सतानेवाले भी सभी मेरे अपने थे,
कब्र में सुलानेवाले भी सभी मेरे अपने थे,
कत्ल करके इल्जाम किसी और पे लगाया,
कातिल को बचानेवाले भी सभी मेरे अपने थे,
तंज़ कसते थे साथ छूटने पे मेरे मुहिब्ब से,
उसे दुल्हन सज़ानेवाले भी सभी मेरे अपने थे,
साद की आश में दिल नासाद रहा मेरा हरदम,
बोझ उसका बढानेवाले भी सभी मेरे अपने थे,
फुर्सत न थी जिसे वो बैठे है पास मेरे जनाजे के,
दिखाके अश्क बहानेवाले भी सभी मेरे अपने थे !
नीशीत जोशी

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  खोता गया, खोता गया, सब कुछ मेरा खोता गया
होता गया, होता गया, तूने चाहा जो होता गया
लुटता गया, मिटता गया, तकदीर से पिटता गया
फिर भी कलम की नोंक को कागज पे घिसता गया
जगता गया, रोता गया, दिन-रात यूं गुजरता गया
एक दिन मरा तो हर कोई मेरी लाश पे हंसता गया
आशिक हुआ, माशूक हुआ, शायर हुआ, दिल से हुआ
हर दर्द को सहता गया, हर जख्म पे गाता गया

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 शायद मै ज़िन्दगी की सहर लेके आ गया
कातिल को आज अपने ही घर लेके आ गया
ताउम्र ढूंढता रहा मंज़िल मै इश्क़ की
अंज़ाम ये की गर्दै-ए-सफ़र लेके आ गया
नश्तर है मेरे हाथ में,काँधे पे मयकदा
लो इलाज-ए-दर्द-ऐ-जिगर लेके आ गया
फाकिर सनम मयकदे मेंआता ना लौटकर
एक ज़ख्म भर गया था इधर लेके आ गया

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 Yaad aaoon to bas itni si inayat karna
Apne badle hue lehje ki wazahat karna
Tum jo chahat ka shahkar hua karte the
Kis se seekha hai yeh ulfat mein milawat karna?
Hum sazaaon ke haqdaar bane hain kab se?
Tum hi keh do kya jurm hai mohabbat karna?
Teri furqat mein yeh aankhein abhi tak num hain,
Kabhi aana mere ashkon ki ziyarat karna.
Dil mein ab bhi mohabbat ke diye hain roshan,
Dekh, bhoole nahi teri hasti ki sajawat karna

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  रात की बात को क्यों दिल से लगा रक्खा है,
सो गया है चाँद मगर दिया जला रक्खा है,
जो करो आज हि कर के उसे पुरा करना,
आज की बात को क्यों कल पे उठा रक्खा है,
हाथ उठेगा दुआ के लिए असर हो जाएगा,
बूतखाना न जाने क्यों फिजूल बना रक्खा है,
आ सकते नही यह मजबूरी ही तो है शायद,
सामने खुद के क्यों मेरा अक्स सजा रक्खा है,
खोखली है मुहब्बत खोखला प्यार जताना,
खाँमखा मेरे दिल को तूने ग़म पिला रक्खा है !!
नीशीत जोशी

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 मंजिल मिले ना मिले ये तो मुकदर की बात है!
हम कोशिश भी ना करे ये तो गलत बात है...
जिन्दगी जख्मो से भरी है, वक्त को मरहम बनाना सीख लो,
हारना तो है एक दिन मौत से, फिलहाल जिन्दगी जीना सीख लो..!!
खूबसूरत सा एक पल किस्सा बन जाता है,
जाने कब कौन ज़िंदगी का हिस्सा बन जाता है,
कुछ लोग ज़िंदगी में मिलते हैं ऐसे,
जिनसे कभी ना टूटने वाला रिश्ता बन जाता है !-–हरिवंशराय बच्चन

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 खुशियां कम और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखिए यहां हैरान बहुत हैं,,
करीब से देखा तो है रेत का घर,
दूर से मगर उनकी शान बहुत हैं,,
कहते हैं सच का कोई सानी नहीं,
आज तो झूठ की आन-बान बहुत हैं,,
मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,
यूं तो कहने को इन्सान बहुत हैं,,
तुम शौक से चलो राहें-वफा लेकिन,
जरा संभल के चलना तूफान बहुत हैं,,
वक्त पे न पहचाने कोई ये अलग बात,
वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत हैं।।।

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  पडा ना फर्क अनो जुबान लिखने से,
जमीन जमीन ही रही आसमान लिखने से...
रहा जिनसे हर घडी ताल्लुख मेरा,
बन ना सका मेरा उसे साथी लिखने से...
पनाह तक नही मिल सकी मुझे चंद पलो की,
उजडे हुये बाग को मेरे गुलशन लिखने से...
कडी तपिश मे झुलजता रहा बदन मेरा दोस्तो.,
के धुप धुप ही रही मेरे सायबान लिखने से...!

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 हर साँस के साथ मुझे सोचा करेगा वो,
अपने हर अक्शं मेँ मुझे धुनडा करेगा वो,
जब याद आयेगी उसको वफा मेरी,
फिर हर शक्स को चाहत से देखा करेगा वो,
आज मेरे दु:ख पर हँस रहा है मेरे सामने,
मुझसे बिछड कर ईसी बात पर रोया करेगा वो.
फिर कैसे मेरे खयाल से दामन छुरायेगा वो,
जब मेरी तरह किसी को चाहा करेगा वो.
मेरे होते हूये मेरा नाम भुलने वाला,
मेरे बाद मेरे नाम से हर एक पुकारा करेगा वो.....।

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 अब किसी से बात करना बोलना अच्छा नहीं लगता,
तुझे देखा है जब से दूसरा कोई अच्छा नहीं लगता!
तेरी आँखों में जब से मैंने अपना अक्स देखा है,
मेरे चेहरे को कोई आइना अच्छा नहीं लगता!
यहाँ अकेले मोहब्बत उम्र भर बर्बाद करते हैं,
ये दरिया है इसे कच्चा घड़ा अच्छा नहीं लगता!
तेरे बारे में दिन भर सोचता रहता हुँ लेकिन,
तेरे बारे में सबसे पूछना अच्छा लगता है!
मैं अब चाहत की उस मंज़िल पे आ पहुंचा हूँ,
जहाँ तेरी तरफ किसी और का देखना अच्छा नहीं लगता!!

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 ↓↓↓ MERA - PYAAR ↓↓↓
उससे प्यार हुआ जिसे हम कभी पा ना सके,
जिसकी बांतो को हम कभी बुला ना सके,
दिल लगाया और लगाकर तोड दिया उसने,
जिसे भुलना चाहा पर हम भुला ना सके,
अपनी कसम दे कर उसने मजबुर कर दिया,
मुझे खुश रखने के लिए खुद से ही दुर कर दिया,
हमारी चाहत को कभी उसने समझा ही नही,
और हम थे कि उनके लिए, अपनो को ही छौड
दियाँ ...!↓↓↓

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 Zindagi hamesha kuchh naya dikhayegi
Kabhi hasengi to kabhi rulayegi
Is par bharosa mat karna
Ye zindagi hai na jane kis mod pe akela chhod jayegi.. 

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 Har shakhs mujhe zindagi jeene ka tareeka batata hai
Unhein kaise samjhaun ki
Ek khwaab adhoora hai mera
Warna jeena to mujhe bhi aata hai..!!

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 लहरों की रवानी देख कर यह न समझना,
कि समंदर में रवानी नहीं है,
जब भी उठेंगे तुफान बन के उठेंगे,
अभी हमने उठने की ठानी नहीं है.

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 Likhun kuchh aaj yeh waqt ka takaza hai,
Mere dil ka dard abhi taaza taaza hai,
Gir padte hain mere aansu mere hi kaagaz par
Lagta hai kalam mein syaahi ka dard zyada hai.

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 Pyaar kya hota hai hum nahi jaante
Zindagi ko hum apna nhi maante
Gham itne mile ki ehsaas nahi hota
Koi hamein pyaar kare ab vishwas nahi hota

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 Manzil kya hai, rasta kya hai,
Hausla hai to fasla kya hai,
Wo saja dekar door ja baithe,
Kis se puchhun ki meri khata kya hai.

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 Yun to koi tanha nahi hota,
chaah kar koi juda nahi hota.
Mohabbat ko to majburiya hi le dubati hain,
warna khushi se koi bewafa nahi hota.

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 Zindgi mein hamme kabhi kuchh chaha hi nahi,
Jis se chaha us se kabhi paya hi nahi,
Jis se paya use yun kho diya jaise,
Zindagi mein kabhi koi aaya hi nahi.

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 Wafa ka naam na lo yaaron,
Wafa dil ko dukhati hai,
Wafa ka naam lene se,
Humein ek bewafa ki yaad aati hai.

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 Thoda sa dil ko udaas kar lia karo,
Hamse door hone ka ehsas kar lia karo,
Hamesha hum hi yaad karte hain apko,
Kabhi aap bhi hamein yaad kar liya karo.

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 AANKHO ME MEHFOOJ RAKHANA SITARE,
AB DOOR TALK SIRF RAAT HOGI....
MUSAFIR HUM BHI HAIN,
MUSAFIR TUM BHI HO,
SHAYAD KISI MOD PAR PHIR MULAQAT HOGI....!

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 Begair Jiske Ek Pal Bhi Guzara
Nahi Hota
Sitam Dekhiye Wohi Shaks Hamara
Nahi Hota..!

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 ना दिखा हुनर अपने जलवो का ....
ये देखते देखते एक उम्र गुजर गई ।
शराब बोतल मे बंद है अच्छा है ...
नशा तब होता है जब खुल गई ॥

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 Gham is kadar mila ki ghabra ke pee gaye,
Khushi thodi si mili to mila ke pee gaye,
Yun to naa thi janam se peene ki aadat,
Sharab ko tanha dekha to taras khaa ke pee gaye.

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 Pee hai sharab har gali har dukan se,
Ek dosti si ho gai hai sharab ke jaam se,
Guzre hain hum ishq mein kuchh aise mukam se,
Ke nafrat si ho gai hai mohabbat ke naam se.

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 Teri aankhon ke ye jo pyale hain,
Meri andheri raaton ke ujale hain,
Peeta hoon jaam par jaam tere naam ka,
Hum to sharabi be-sharab wale hain..!!

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 Ek jaam ulfat ke naam,
Ek jaam mohabat ke naam.
Ek jaam wafa k naam,
Puri botal bewafa ke naam,
Aur pura theka doston ke naam.

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 Rok do mere janaze ko zaalimon,
Mujh mein jaan aa gayi hai,
Peeche mud ke dekho kameeno,
Daru ki dukan aa gayi hai…
CHEERS !!

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 Raat chup hai magar chand khamosh nahi,
Kaise kahoon aaj phir hosh nahi,
Is tarah dooba hoon teri mohabbat ki gahrai mein,
Hath mein jaam hai aur peena ka hosh nahi.

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 Pee ke raat ko hum unko bhulane lage,
Sharab mein gham ko milane lage,
Daru bhi bewafa nikali yaron,
Nashe mein to woh aur bhi yaad aane lage.

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 Aashikon ko mohabbat ke alava agar kuchh kaam hota,
Toh maikhane jake har roz yun badnam na hota,
Mil jaati chahne wali usse bhi kahin raah mein koi,
Agar kadmon mein nasha aur hath mein jaam na hota.

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 Madhhosh hum hardam raha karte hain,
Aur ilzaam sharaab ko diya karte hain,
Kasoor sharaab ka nahi unka hai yaron,
Jinka chehra hum har jaam mein talaash kiya karte hain.

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 Ishq-a-bewafai ne daal di hai aadat buri,
Main bhi sharif hua karta tha is zamane mein,
Pehle din shuru karta tha masjid mein namaaz se,
Ab dhalti hai shaam sharab ke sath mehkhane mein.


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