Tareef Shayari for Girlfriend hindi



#कोयल के जैसे #चहचहाती रहना तुम
जिंदगी #अपनी #खुशियों से #सजाती रहना तुम
मैं #मौसम हूँ #गम का गुजर #जाऊँगा एक रोज
पर #जिंदगी भर #सनम #मुस्कुराती रहना तुम

तेरे लब ज्यों नाजुक कोंपल कोई,
तुम खिलती हुई कली गुलाब सी,
आँखें ज्यों मय से भरे प्याले,
तुम लगती हो सुनहरे ख्वाब सी..!!

Teri har adaa nasheeli hai,
Itni ki kisi aur nashe ki jarurat hi na pade,
Doob jana chahta hu teri aankho me,
Itna ki nikalne ki jarurat na pade…


Tere Chehre Pe Meri Ankhe Safar Karti Hai,
Chaand Ke Pehlu Me Jaise Raaten Safar Karti Hai,
Mai Tujhe Aur Kya Wafa Ka Sila Du,
Tere Seene Me Meri Saan se Safar Karti Hai..!

खुशबू से भींग जाएगी,
नाज़ुक सी उंगलियाँ मेरे दिए गुलाब को आप मसल के देखिए
ये हुस्न देखकर ही तो वो चाँद परेशान है
वो जल रहा है आपसे, अपने ही छत से देखिए

दमक रहा था तेरा बदन,
चंदा की चाँदनी जैसे,
हया से छुई-मुई थी ऐसे,
शबनम की बूँद नाज़ुक जैसे,
छलकती आँखें लरजते होंठ,
कल रात तुझे मचलते-सुलगते देखा है.!!

उन के होंठो को देखा तब एक बात उठी ज़हन में,
वो लफ्ज़ कितने नशीले होंगे जो इनसे हो कर गुज़रते है।।

!Musqurate Hain To Bijliya Gira Dete Hain,
Baat Karte Hain To Deewana Bana Dete Hain,
Husan walo Ki Nazar Kam Nahi qayamat Se,
Aag Pani Me Vo Nazaron Se Laga Dete Hain…!

हसरत है सिर्फ तुम्हें पाने की और कोई ख्वाहिश नहीं
इस दीवाने की शिकवा मुझे तुमसे नहीं खुदा से है
क्या ज़रूरत थी तुम्हें इतना खूबसूरत बनाने की !!

Duppata Kya Rakh Liya Sar Par Wo Dulhan Nazar Aaney Lgi.
Unki To ye Aadaa Ho Gaayi Hai
Apni to Jaan Jaane Lagi ...!!!!
Wo Aati Hain To Dil Me Ek Kasak Mehsoos Hoti Hai...
Main Darta Hoon Kahin Isi Ko Mohabbat To Nahi Kehte...

Naa Puchiye Adaa Unky Muskurany Ki...
Palak Jhapkaty, Lab Hilaty, Jaan Nikalty Hain Wo..!!

"हँसती थी हँसाती थी दिल को बहुत भाती थी
देख-देख शरमाती थी फिर अंदर से मुस्कुराती थी
आज पता चला कि वो तो एक पागल थी."

लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे;
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे;
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद;
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।

तेरी बात में गीतों की सरगम, तेरी चाल में पायल की छमछम
कोई देख ले तुझ को एक नज़र, मर जाये तेरी आँखों की कसम
मैं भी हूँ अजब एक दीवाना, मरता हूँ ना आहें भरता हूँ
कहीं भूल से तू ना समझ बैठे के मैं तुझ से मोहब्बत करता हूँ

जाने कभी गुलाब लगती हे
जाने कभी शबाब लगती हे
तेरी आखें ही हमें बहारों का ख्बाब लगती हे
में पिए रहु या न पिए रहु,
लड़खड़ाकर ही चलता हु
क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हे

खूबसूरत है वो इतना कि सहा नही जाता,
कैसे हम खूद को रोक ले रहा नही जाता,
चाँद में दाग है ये जानते है लेकीन,
रात भर देखे बिना उसको रहा नही जाता

आँखों से इजहार, फिर, लबों से इन्कार....
वो फिर अदा से तेरा हाथ फेरना बालों में....
समझ पाऊँ कुछ तेरी इन अदाओं का राज,
कि तेरी मुस्कान ने उलझा दिया नए सवालों में..!!

तेरी अदा लिखूं !!!
जब भी तुम्हे देखा दिल ने कहा कुछ लिखूं
तेरी खूबसूरती लिखूं ,कि तेरी अदा लिखूं ।
तेरी आँखों की उठती पलकों से निखरी सुबह
या तेरी झुकती पलकों में छुपी शाम लिखूं ।
तेरी रेशम सी लहराती जुल्फों से बरसती घटा
या तेरी खामोश जुल्फों से उतरी छांव लिखूं ।
महफ़िलो में तेरे हुस्न से बनायीं हुई गजल
तन्हाई में कोरे कागज पर तेरा नाम लिखूं ।*



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